Q&A
07:58 PM | 06-10-2019

Hello, i am 26 (female)years old,i have irregular periods problem, how to treat it,i took many time allopathy medication but its not work. Please give suggestions. What can i do?

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5 Answers

04:53 PM | 09-10-2019

First find out why do you have irregular cycle.. Then check do you have any physical changes.. and increase your physical activity, always keep yourself in stable mood



04:52 PM | 09-10-2019

Namaste,

The main cause of irregular period is high levels of impurities and toxins increased in health. When levels of impurities and toxins increased body stores them in the form of cysts around ovaries.

History of improper diet and lifestyle is generally found major reason of irregular periods.

How to overcome with natural diet and life style:

Lighter organic fruits, such as apples, oranges, grape fruit, pineapple and papaya and pears, are recommended.

Beans are recommended. Nuts should be avoided.

Negative feelings like stress and tension should be avoided. Do not undertake physical or mental work beyond your capacity.

Don't take any medicine for longer period which leads to side effects.

Manage your weight and stress.

Fresh vegetables, fruits are highly recommended. Have some physical exercise. Morning sunlight exposure is preferred.

Take care of your health.



06:24 PM | 07-10-2019

Adopting a natural lifestyle will help you in reclaiming your health. Wellcure’s Buddy Program helps you in making the transition, step by step. If you would like to know more, please email us at info@wellcure.com.



06:23 PM | 07-10-2019

नमस्ते ,

गलत दिनचर्या, आलस्य ,अधिक परिश्रम, उत्तेजक दवाइयों या नशीली वस्तुओं का सेवन, भय ,क्रोध ,मानसिक उत्तेजना, रक्त की कमी ,मलेरिया, बहुत ठंडा पानी पीना, माहवारी के दिनों में भीगना ,बवासीर, यकृत या प्लीहा के रोग ,कम भोजन करना, अधिक पतला या मोटा होना इत्यादि की वजह से ऋतु स्राव में गड़बड़ी होती है ।

 

  • नींद रात्रि में 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लें इससे शरीर से दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं कोशिकाओं का निर्माण होता है!
  •  प्रतिदिन गुनगुने पानी, नींबू एवं शहद का सेवन करें इससे आंतों की दीवारें फैलती हैं ,दूषित पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं ।
  • जूस- प्रतिदिन अनन्नास ,नारियल पानी ,अनार ,चुकंदर या पालक के जूस का सेवन करें ।
  • भोजन हल्के सुपाच्य मौसमी फल व सब्जियों से युक्त भोजन को खूब चबा चबाकर सेवन करें ,इससे भोजन का पाचन आसानी से होता है ,पर्याप्त मात्रा में शरीर को पोषण प्राप्त होता है । 
  • सलाद अंकुरित चना व मूंग प्रतिदिन 400 ग्राम प्रातः एवं सायं सेवन करें।
  • मिट्टी के घड़े में रखे हुए जल को जब भी प्यास लगे बैठकर धीरे-धीरे सेवन करें इससे शरीर को आवश्यक जल की आपूर्ति हो जाती है।
  • चार चम्मच मेथी एक गिलास पानी में उबालें जब आधा रह जाए उतार दे ,पीने योग्य हो जाए उसे जाए।
  • सुगंधित पुष्पों से युक्त बगीचे में प्रसन्न चित्त होकर ओंस पड़ी हुई घास पर नंगे पांव टहलें।
  • प्राणायाम -कपालभाति , अनुलोम-विलोम, भ्रामरी ;पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है ,मन शांत होता है ,तनाव कम हो जाता है ।
  • निषेध जानवरों से प्राप्त भोज्य पदार्थ, चीनी व मैदे से बनी हुई चीजें ,डिब्बाबंद- मसालेदार पदार्थ, ठंडे पेय पदार्थ, क्रोध, ईर्ष्या ,चिंता, तनाव ,रात्रि जागरण ,सोने से 2 घंटे पहले मोबाइल, टेलीविजन, कंप्यूटर का प्रयोग।


06:23 PM | 07-10-2019

हेलो,

कारण - पाचन तंत्र के स्वास्थ बिगड़ने पर शरीर में मौजूद संक्रमित जीवाणु (toxin) हार्मोन के संतुलन में दोष पैदा करते है।शरीर के में हार्मोन के संतुलन के बिगड़ने से शरीर का चया पचय (metabolism) का संतुलन बिगड़ जाता है।

समाधान - नीम के पत्ते का पेस्ट और खीरा अपने पेट पर रखें। 20मिनट तक रख कर साफ़ कर लें।

शरीर को यह ज्ञान है कि ख़ुद को स्वस्थ कैसे रखना है। हम इस बात से अनभिज्ञ हैं। जब हमारी प्राणशक्ति हमें ऊर्जा दे रही होती है तो वह स्वास्थ्य की स्थिति है। जब हमारी प्राण शक्ति हमारे शरीर के अंदर विषाणुओं (toxic) को साफ़ करने में लग जाती है तो वह अस्वस्थ होने की स्थिति होती है।

प्राण शक्ति ने सिर्फ़ अपना काम बदल लिया क्योंकि हमने अपनी ग़लत आदतों के वजह से उसे ऐसा करने पर मजबूर किया है। अब उसको सही खुराक से मदद करें और उसपर विश्वास बनाए रखें।

आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी ये पाँच तत्व आपके शरीर में रोज़ खुराक की तरह जाना चाहिए।

पृथ्वी और शरीर का बनावट एक जैसा 70% पानी से भरा हुआ। पानी जो कि फल, सब्ज़ी से मिलता है।

1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें।

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।I

खुली हवा में बैठें या टहलें।

3 अग्नि तत्व- सूरर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें और खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा करना है।

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। 

5 पृथ्वी- सब्ज़ी, सलाद, फल, मेवे, आपका मुख्य आहार होगा। आप सुबह सफ़ेद पेठे 20ग्राम पीस कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है।

दोपहर में 12 बजे फिर से इसी जूस को लें। इसके एक घंटे बाद खाना खाएँ।शाम को 5 बजे सफ़ेद पेठे (ashguard) 20 ग्राम पीस कर 100 ml पानी मिला। 2घंटे तक कुछ ना लें। रात के सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurad) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। इसी प्रकार हरा गोभी, बंद गोभी, गाजर, चुकन्दर भी कद्दूकस करके डालें। हर दिन मुख्य सब्ज़ी किसी एक की मात्रा अधिक बाँकि सब थोड़ा थोड़ा डालें। ताज़ा नारियल पीस कर मिलाएँ। कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। इसे बिना नमक के खाएँ। नमक सेंधा ही प्रयोग करें। नमक की मात्रा दोपहर के खाने में भी बहुत कम लें। सब्ज़ी पकने बाद उसमें नमक डालें। नमक पका कर या अधिक खाने से शरीर में (fluid)  की कमी हो जाती है। रात का खाना 8 बजे खाएँ।एक नियम हमेशा याद रखें ठोस (solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल (liquid) को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें। ठोस (solid) भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ (liquid) ले सकते हैं।

ऐसा करने से हाज़मा कभी ख़राब नहीं होगा।

जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ का सेवन करें।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी लें और 2 घंटे बाद सलाद लें।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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