09:54 AM | 07-11-2019

I was diagnosed with ulcer with h pylori positive,and gastric problem. I took medicines for ulcer one month and ppi medicine for two months. Now after stopping medicine acid reflux is happening. Again if I go to doctor they will give some acid control medicines. Also I have lost weight due to this. Can you please help? Appreciate if you type in English.

The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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4 Answers

05:04 PM | 08-11-2019

Hi. Please refer to the below resources to understand more about digestive issues & Nature Cure.

  1. Blogs - 

    1. Take control of constipation

    2. Understand Your Acidity & Help Yourself Naturally

    3. Keep Calm and Beat IBS Naturally with 8 Lifestyle Changes.

  2. Real-life natural healing stories of people who cured digestive issues just by following Natural Laws.

Adopting a natural lifestyle will help you in reclaiming your health. You can explore our Nature-Nurtures Program that helps you in making the transition, step by step. 

05:03 PM | 08-11-2019


जब भोजन पचाने वाला अम्ल आमाशय या आंत की भीतरी श्लैष्मिक झिल्ली को नुकसान पहुँचाने लगता है। हमारे पेट में म्यूकस की एक चिकनी परत होती है जो पेट की भीतरी परत को पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड से बचाती है। यह दोनों एसिड पाचन क्रिया के लिए जरूरी होते हैं लेकिन यह शरीर के ऊत्तकों को नुकसान भी पहुँचा सकते हैं। यह एसिड और म्यूकस झिल्ली के बीच का संतुलन बिगड़ने पर ही अल्सर होता है।

Helicobactor Pylori नामक बैक्टेरिया का संक्रमण इसका सबसे प्रमुख कारण है। 

यह दूषित भोजन एवं पानी के द्वारा पेट में जाता है,पेट में अत्यधिक मात्रा में एसिड का स्राव होना,तैलीय और मिर्च मसाले युक्त भोजन का अधिक सेवन करना,अधिक मात्रा में शराब, कैफीन और तम्बाकू का सेवन,लम्बे समय तक ज्यादा दर्द निवारक दवाओं का या ओस्टियोपोरोसिस में ली जाने वाली दवाओं का सेवन करना,एस्पिरिन या ज्वलनरोधक दवाओं का सेवन करना, अत्यधिक तनाव के कारण,अनुवांशिकक कारणों से,डायबिटीज इत्यादि की वजह से हो जाता है।

निम्नलिखित योग एवं नेचुरोपैथी उपचार इसमें सहायक सिद्ध होंगे-

  • प्रतिदिन प्रात गुनगुने पानी नींबू एवं शहद का सेवन करें इससे आंतों में स्थित दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं पाचन अंगों को आराम मिलता है।
  • प्रतिदिन नाशपाती, अंगूर, पत्ता गोभी, पालक ,चुकंदर या गाजर के जूस का सेवन करें।
  •  प्रतिदिन भोजन में 80% मौसमी फल एवं हरी पत्तेदार सब्जियों पत्ता गोभी ,मूली इत्यादि का सेवन खूब चबा चबाकर करें इसी का पाचन अवशोषण एवं उनका निष्कासन आसानी से होता है।
  • सप्ताह में 1 दिन उपवास रहें, इससे शरीर के समस्त अंगों को आराम मिलता है उनकी कार्य क्षमता बढ़ जाती है।
  • रोज एक सेब खाने से पेट के अल्सर से प्रभावित होने की समस्या कम हो जाती है। सेब में flavanoids होते हैं जो H.pyloriनामक पेट के अल्सर के bacteria को पनपने से रोकते है।
  • प्रतिदिन अनुभवी योग एवं नेचुरोपैथी फिजीशियन के निर्देशन में वज्रासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, शीतली ,शीतकारी ,अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास करें।
  •  निषेध -जानवरों से प्राप्त भोज्य पदार्थ,वसा से बनी हुई चीजें, चीनी ,मैदा, नमक से बनी हुई चीजें ,क्रोध, चिंता ,तनाव ,रात्रि जागरण।

01:03 PM | 08-11-2019

The gastrointestinal tract starts from the mouth and ends with the Rectum. If the entire tract is lined with rotting waste, unwanted bacteria and foods that were not digested properly in the stomach. The causes still remain the same - foods such as dairy, eggs, gluten, meat, seafood consumed over a long period of time with heavy fats and proteins that weakens the bile and the hydrochloric acid in the gut. With weaker stomach acids and ineffective weak bile, the food does not get digested properly and leaks into the intestine while the pathogens feed on them. Overtime it reaches the colon which is the final dumping ground.

Please understand germs are not to blame whether they come to feast in the mouth or anywhere on the GI tract.They come to decompose and feast on the rotting matter. That’s the natural law of decomposition.

To heal this condition, Clean the gut.  Stop suppressing chemicals going in. eat fruits majorly and drink veg juices. Flush the stomach with raw juices slowly and then start solids in the form of fruits first, greens and then veggies. Have juicy vegetables for most of the day. Quit all kinds of animal products like dairy, eggs, meat, fish and anything that contains them in any form. Avoid and quit sugar, maida wheat oils outside foods or ready to eat meals. ur gut will heal in 1-2 months and get better n better as days progress. Apply a cold wet cloth for 1 hr daily twice or thrice a day on ur stomach. Do not eat outside. Constant wrong eating habits have deteriorated the stomach causing the status inflammation of the gastrointestinal tract. As much as possible have one quick meal per day for dinner.rest of the Day start with juices have fruits and stay on raw food to improve the condition of your stomach 

Reduce emotional and physical stress in your life. Join a yoga and pranayama class and spend time doing physical exercises. Connect with nature expose yourself to sunlight 30 minutes per day. Take a fresh breath of air in the morning by going for walks or Jogging. 

Lastly remember that yoga alone without any food changes will not bring improvement to the body. A holistic approach to healing always has both food and exercises working together. Holistic healing always has healing of mind body and spirit.

Be blessed 

Smitha Hemadri ( Educator of natural healing practices )

09:20 AM | 08-11-2019



कारण - ख़राब पाचन क्रिया, दोष पुर्ण आहार (wrong food habit), तनाव (stress), अनिद्रा sleep dificency, नशीली पदार्थों के सेवन से पेट में अम्ल acid की मात्रा अधिक बनने से पेट में भोज्य पदार्थ में सड़न पैदा होने लगता है। ये पेट व आंतों में संक्रमण पैदा कर देता है। जिससे आंतों व पेट में अल्सर बनने लगते हैं। 

अम्ल का बनना और क़ब्ज़ ना होना ही इसके बचाव का तरीक़ा है।

समाधान - शारीरिक और मानसिक क्रिया में संतुलन बनाए। अनुलोम विलोम, कपालभाती, 10 बार करें। सूर्य नमस्कार 5बार करें। दौड़ लगाएँ। सुप्त मत्स्येन्द्रासन, धनुरासन, गोमुख आसन,

पश्चिमोत्तानासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, शवासन करें।

10% कच्चे हरे पत्ते और सब्ज़ी का जूस बिना नमक निम्बू के लेना है।30% कच्चे सब्ज़ी का सलाद बिना नमक निम्बू के लेना है।10% ताज़ा नारियल सलाद में मिला कर लेना है। 20% फल को लें। पके हुए खाने को केवल एक बार खाएँ नमक भी केवल एक बार पके हुए खाने लें। पके हुए खाने में सब्ज़ी भाँप में पके हों और तेल घी रहित होना चाहिए सब्ज़ी की मात्रा 20% और millet या अनाज की मात्रा 10% हो।  वर्षों से जमी टॉक्सिन को निकालना ज़रूरी है। किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में पहली बार लें। एनिमा किट मँगा लें । यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 100ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में एक बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में उपस्थित विषाणु निष्कासित हो जाये।ओ

शरीर पाँच तत्व से बना हुआ है प्रकृति की ही तरह।

आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी ये पाँच तत्व आपके शरीर में रोज़ खुराक की तरह जाना चाहिए।

पृथ्वी और शरीर का बनावट एक जैसा 70% पानी से भरा हुआ। पानी जो कि फल, सब्ज़ी से मिलता है।

आपका मुख्य आहार ये हुआ तो बहुत अच्छा हो जाएगा।

1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें।

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें। इसके बाद फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें, रुकें, फिर स्वाँस अंदर भरें। ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक समय पर करना है। ये दिन में चार बार करें। खुली हवा में बैठें या टहलें।

3 अग्नि तत्व- सूर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं।

नीम के पत्ते का पेस्ट अपने नाभि पर रखें। 20मिनट तक रख कर साफ़ कर लें। मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। 

5 पृथ्वी- सब्ज़ी, सलाद, फल, मेवे, आपका मुख्य आहार होगा। आप सुबह खीरे का जूस लें, खीरा 1/2 भाग + धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। बेल का पत्ता 8 से 10 पीस कर I100ml पानी में मिला कर पीएँ। खीरा 1/2 भाग + धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। बेल पत्ता 8 से 10 पीस कर 100 ml पानी में मिला कर लें। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। जो की आपको ज़बर्दस्त फ़ायदा करेगा। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें।

दोपहर में 12 बजे फिर से कच्चे सब्ज़ी जूस को लें। इसके एक घंटे बाद खाना खाएँ।शाम को 5 बजे सफ़ेद पेठे (ashguard) 20 ग्राम पीस कर 100 ml पानी मिला। 2 घंटे तक कुछ ना लें। रात के सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डाले। ताज़ा नारियल मिलाएँ। रात का खाना 8 बजे खाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। इसे बिना नमक के खाएँ, बहुत फ़ायदा होगा। पृथ्वी तत्व को शरीर में डालने का एक नियम हमेशा याद रखें ठोस (solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल (liquid) को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें। ठोस (solid) भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ (liquid) ले सकते हैं। ऐसा करने से हाज़मा कभी ख़राब नहीं होगा। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन छोड़ने से ज़्यादा लाभ होगा।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। 



प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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