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Q&A
11:25 AM | 18-11-2019

Hi... I have sinus problem from six months what is the solution? I have 9 month baby.


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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6 Answers

06:07 PM | 02-12-2019

Hello,

Neti
Jal neti is very effective in sinuses problem and it should be performed regularly. 

Oil drops
Put two-two drops of oil in each nostril every day. 

Yoga

  • Perform anulom-vilom daily. 
  • Practice bhramri pranayam on a regular basis. 
  • Do suryanamaskar regularly. 

Diet

  • Have an only plant-based natural diet. 
  • Have coconut water and fresh fruit juices. 
  • Drink sufficient water during the day. 

Things to avoid 

  • Avoid dairy products like milk, curd, paneer, butter. 
  • Avoid processed and packaged foods. 
  • Avoid deep-fried foods. 
  • Avoid spicy foods. 
  • Avoid tea, coffee, and other caffeinated drinks. 

Thank you 



09:34 AM | 19-11-2019

In yoga there is a practice called jalaneti. It is a  kriya( cleaning practice). 
Learn from a yoga expert and surely you may get a permanent relief.



05:13 PM | 18-11-2019

Hi. We would like to guide you to Health Journeys of people who could cure their long-standing respiratory issues by simply adhering to natural laws. Your medicine is - natural lifestyle. Shifting to a natural lifestyle will help you in addressing the problem at its root. You can explore our Nature-Nurtures Program that helps you in making the transition, step by step. We will guide you on diet, sleep, exercise, stress to correct your existing routine & make it in line with Natural Laws.  



02:07 PM | 18-11-2019

हेलो,

 

कारण - साइनस नाक में होने वाला एक रोग है। इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। यह बीमारी आम सर्दी के रूप में शुरू होती है और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के साथ बढ़ जाती है। इस रोग से होने पर ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है। 

समाधान - शारीरिक और मानसिक क्रिया में संतुलन बनाए। दौड़ लगाएँ।सुप्त मत्स्येन्द्रासन, धनुरासन, पवन मुक्त आसन करें।

पश्चिमोत्तानासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, शवासन करें। अनुलोम विलोम करें।

10% कच्चे हरे पत्ते और सब्ज़ी का जूस बिना नमक निम्बू के लेना है।30% कच्चे सब्ज़ी का सलाद बिना नमक निम्बू के लेना है।10% ताज़ा नारियल सलाद में मिला कर लेना है। 20% फल को लें। पके हुए खाने को केवल एक बार खाएँ नमक भी केवल एक बार पके हुए खाने लें। पके हुए खाने में सब्ज़ी भाँप में पके हों और तेल घी रहित होना चाहिए सब्ज़ी की मात्रा 20% और millet या अनाज की मात्रा 10% हो।

लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें। इसके बाद फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें, रुकें, फिर स्वाँस अंदर भरें। ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक समय पर करना है। 

सूर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

जीवन शैली - आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है। नारियल तेल से

घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

पृथ्वी - सुबह खीरे का जूस लें, खीरा 1/2 भाग + धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। बेल का पत्ता 8 से 10 पीस कर I100ml पानी में मिला कर पीएँ। खीरा 1/2 भाग + धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। बेल पत्ता 8 से 10 पीस कर 100 ml पानी में मिला कर लें। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल + सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद + नट्स और अंकुरित अनाज के लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लें। एक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।ओ

सेंधा नमक केवल एक बार पके हुए खाने में लें। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ  ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)

 



02:07 PM | 18-11-2019

Sinus is congested and infected lymph nodes. You must switch to an alkaline lifestyle for relief permanently. Cold and coughs or sinus is a common problem that happens wioth mucus forming foods that majorly come from animals.

I suffered like you for as long as I remember since my childhood and meds were my best friends. By the time I was 30, things had peaked and faced severe allergies and had two near deaths.

The first step you have to take is to switch to a plant-based lifestyle thats best for you and your baby. The baby will also continue to face the sam,e issues you are facing today. Nothing must come from an animals - dairy, meat eggs fish. Quit sugar wheat maida and all forms of medicines fully. From this point, your body will continue to give you a hard time and eliminate with more cold cough fever etc. Allow it to happen and don’t stop it. Stay on fruit or veg juices for 1-2 days if it’s too severe. Gargle with salt and turmeric daily. Next to speed up the detox, have juices till 12, fruits for lunch and salad for evening. Switch to an unpolished oil-free millet dinner.

You will be cured in 1-3 months easily provided you absolutely follow a natural lifestyle and eliminate all the wrong foods

Check this story on Wellcure

http://www.wellcure.com/health-journeys/37/my-body-won-me-freedom-from-allergies-and-respiratory-issues

 

Be blessed

Smitha Hemadri ( Educator of natural healing practices )

 

 



06:12 PM | 02-12-2019

नमस्ते,

हमारे सिर में कई खोखले छिद्र (कैविटीज) होते हैं, जो सांस लेने में हमारी मदद करते हैं और सिर को हल्का रखते हैं। इन छिद्रों को साइनस या वायुविवर कहा जाता है। जब इन छिद्रों में किसी कारणवश गतिरोध पैदा होता है, तब साइसन की समस्या उत्पन्न होती है, ये छिद्र बैक्टीरिया, फंगल व वायरल  कारणों से प्रभावित हो सकते हैं और इसे गंभीर बना देते हैं। 
जुकाम : साइनस का सबसे सामान्य कारण जुकाम है, जिसकी वजह से नाक निरंतर बहती है या फिर बंद हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। जुकाम एक प्रकार का संक्रामक होता है, जो किसी और के माध्यम से भी आपको चपेट में ले सकता है। जिन लोगों को लगातार जुकाम होता है, उन्हें साइनस होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है ।

प्रदूषण : साइनस की समस्या प्रदूषण के कारण भी हो सकती है। ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वाले लोग इस बीमारी की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। धूल के कण, स्मॉग और दूषित वायु के कारण साइनस की समस्या बढ़ सकती है। ये हानिकारक कण सीधे हमारी श्वास नली पर प्रहार करते हैं। इससे धीरे-धीरे जुकाम, नाक का बहना व दर्द आदि समस्या होती है। इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए ।

एलर्जी :  बहुत से लोगों को नाक संबंधी एलर्जी की शिकायत रहती है, बाहर की दूषित वायु के संपर्क में आते ही यह समस्या बढ़ जाती है। नाक संबंधी एलर्जी मौसमी भी हो सकती है, सर्दियों के दौरान ऐसी समस्या ज्यादा देखी गई है। सर्दियों में नाक का बहना, नाम की नलियां बंद हो जाना, गले में दर्द, आवाज में बदलाव, सिरदर्द आदि ।

नाक की हड्डी बढ़ना : नाक की हड्डी बढ़ने के कारण भी साइनस की समस्या हो जाती है। दरअसल, बचपन या किशोरावस्था में नाक पर चोट लगने या दबने के कारण नाक की हड्डी एक तरफ मुड़ जाती है, जिससे नाक का आकार टेढ़ा दिखाई देता है। हड्डी का यह झुकाव नाक के छिद्र को प्रभावित करता है, जिससे साइनस की समस्या हो सकती है। कोई भी कारण, जो श्वास छिद्रों में अवरोध पैदा करते हैं, उनसे साइनस की समस्या पैदा हो सकती है ।

अस्थमा : अस्थमा सांस संबंधी गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों व श्वास नलियों को प्रभावित करती है। अस्थमा से ग्रसित मरीज ठीक प्रकार से सांस नहीं ले पाता।

भोजन : भोजन की अनियंत्रित मात्रा व पोष्टिक तत्वों की कमी से पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जो आगे चलकर साइनस की समस्या की जड़ बन सकता है। इसलिए जो खाएं, देख-समझ कर ही खाएं।

आपको निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-

  • नींद- रात्रि में 7 से 8 घंटे के लिए दावत से लें अवश्य सोएं इससे शरीर से दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत होती है।
  •  प्रतिदिन प्रातः गुनगुने पानी नींबू एवं शहद का सेवन करें इससे आंतों के दीवारें फैलती हैं ,दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  •  प्रतिदिन नारियल पानी ,एलोवेरा, अनार या पालक के जूस का सेवन करें इससे शरीर से दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं शरीर में अम्ल एवं क्षार का संतुलन बना रहता है ।
  • प्रतिदिन भोजन में  50% ताजे मौसमी फल 35% हरी पत्तेदार सब्जियां 10% साबूत अंकुरित अनाज 5%सूखे मेवे का प्रयोग करें ये हल्के एवं सुपाच्य होते हैं ,शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषण प्राप्त होता है, शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से अपना कार्य करते हैं ।
  • प्यास लगने पर मिट्टी के घड़े में रखे हुए जल को बैठकर धीरे-धीरे सेवन करें  इससे पाचन अंगों को आराम मिलता है ,दूषित पदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं।
  •  सप्ताह में कम से कम 1 दिन उपवास रहें इससे शरीर में स्थित दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं  पाचनतंत्र को आराम मिलता है।
  • प्याज को काट कर उसे सीधे सूंघकर या फिर गर्म पानी में उबालकर, उसकी भाप नाक के मार्ग से लेकर। ऐसा करने से नाक की बंद नलियां खुल जाती हैं और दर्द काफी हद तक कम हो जाता है। आप प्याज के गर्म पानी को पी भी सकते हैं।
  • एक गिलास गर्म पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें,इसके अलावा, शहद में नींबू का रस मिलाकर लें,शहद में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन नाक और गले में होने वाले संक्रमण से आपका बचाव करेगा ।
  • कपालभाति ,अनुलोम विलोम एवं भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करें, इससे शरीर से दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं ,मन शांत एवं तनाव मुक्त होता है।
  • अनुभवी योग एवं नेचुरोपैथी फिजीशियन के निर्देशन में जलनेति का अभ्यास करें इससे नाक में स्थित श्लेष्मा बाहर निकल जाती हैं श्वास का आदान-प्रदान सुचारू रूप से होने लगता है।

निषेध- जानवरों से प्राप्त भोज्य पदार्थ ,चीनी, मैदा, वसा से बनी हुई चीजें, क्रोध ,ईर्ष्या, चिंता, तनाव ,रात्रि जागरण ,सोने से 2 घंटे पहले मोबाइल, टेलीविजन, कंप्यूटर का प्रयोग।


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