Q&A
03:32 PM | 14-01-2020

My son Harshal is having depression/anger and is afraid of working in a job. Can you pls let me know your suggestion regarding this?


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4 Answers

08:25 PM | 14-01-2020

Underlying toxemia or accumulation of toxins are some of the major reasons for anxiety attacks depression, insomnia, fear, and similar issues. Correcting the food habits and living conditions is very important to bring improvement in these areas. Remove all kinds of dead animal products from your life such as dairy from the food; that is meant for the calf and not for humans, meat and fish that is dead and lifeless, Eggs that attract viral activity in the body, refined sugar, refined salt, excessive consumption of grains in the entire day, Consumption of excessive oil in cooking, eating fried food can lead to accumulation of debris in the body which putrefies and rots giving rise to all kinds of viral and bacterial activity that can impact the sleep cycles and cause nervous issues such as anxiety. Everything in the body is based on electrical signals. If there are inflammations then short-circuiting can happen and messages can be misinterpreted by the brain.

It could also be emotional to start with which typically becomes a physical issue as I explained above.

Switch to a whole food plant-based diet with raw all day to starve the virus in an alkaline diet. Gluten-free, oil-free dinner. Exercise daily, have enough liquids to flush the virus from the body. Expose yourself to natural elements such as the sun, earth.

I am working with people with depressions and anxiety issues. If you are comfortable to take this forward in detail with me over a call, reach me on this link

https://rzp.io/l/1LR1mH1

Be blessed

Smitha Hemadri (educator of natural healing practices)



08:23 PM | 14-01-2020

Depression (major depressive disorder) is a common and serious medical illness that negatively affects how you feel, the way you think and how you act. Fortunately, it is also treatable. Depression causes feelings of sadness and/or a loss of interest in activities once enjoyed. It can lead to a variety of emotional and physical problems and can decrease a person’s ability to function at work and at home.

Some of the causes might be due to genetics or hereditary, biochemical, environmental or social, sored relationships, etc

Conventional management might be by antidepressants, antipsychotics, cognitive behavioral therapy, and electroconvulsive therapy, etc in advanced cases.

Some self practices might be as follows:

  • Exercising regularly could beat up your depressive moods.
  • Try to relax with some leisure activities like hobbies of your interest, travel, socializing, gardening, pets, etc
  • Meditation could also work and try practicing under a trained guide who could teach you basic skills to master meditation.
  • Yoga has a vital role to play and under yoga therapist, if you could practice Yoga it could really help you get out of the medications
  • Music Therapy - It could be defined either listening to music, playing any musical instruments or singing as this could also help you beat up your mood swings that are common in depression.
  • Undergoing Naturopathy treatments under registered naturopaths could be useful and also provide counseling sessions.

A counseling session with a psychologist or psychiatrist could be of great use.



08:19 PM | 14-01-2020

हेलो,

कारण - दर्दनाक या तनावपूर्ण घटनाओं का अनुभव से भी ऐसा हो सकता है।अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकार जैसे चिंता, डिप्रेशन, मादक द्रव्यों का सेवन से ऐसा हो सकता है।

समाधान - भ्रामरी प्राणायाम,ताड़ासन, नटराजासन

वृक्षासन,हस्तपादासन, सर्वांगासन, हलासन, पवन-मुक्तासन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।

प्रतिदिन आप ख़ुद को प्यार दें अपने बारे में 10 अच्छी बातें कोरे काग़ज़ पर लिख कर और प्रकृति को अपने होने का धन्यवाद दें।

मानसिक समस्या भी इसी शरीर की समस्या है सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हम किसी भी परिस्थिति में सकारात्मक सोंच रखते हैं या नकारात्मक।

प्राकृतिक जुड़ाव आपको सकारात्मक सोंच प्रदान करेंगी क्योंकि प्राकृतिक जीवन शैली अपने आप में पूर्ण भी है और जीवंत भी है। पाँच तत्व से प्रकृति चल रही है और उसी पाँच तत्व से हमारा शरीर चल रहा है।

जीवन शैली - 1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें। वाद्य यंत्र शास्त्री संगीत (instrumental classical music)सुनें।ह

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।अपने कमरे में ख़ुशबू दार फूलों को रखें।

3 अग्Iनि तत्व- सूर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- 4 पहर का स्नान करें। सुबह सूर्य उदय से पहले, दोपहर के खाने से पहले, शाम को सूर्यअस्त के बाद, और रात सोने से पहले स्नान करें। नहाने के पानी में ख़ुशबू वाले फूलों का रस मिलाएँ। नींबू या पुदीना का रस मिला सकते हैं।खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें। 

सर पर सूती कपड़ा बाँध कर उसके ऊपर खीरा और मेहंदी या करी पत्ते का पेस्ट लगाएँ,नाभि पर खीरा का पेस्ट लगाएँ।पैरों को 20 मिनट के लिए सादे पानी से भरे किसी बाल्टी या टब में डूबो कर रखें।

5 पृथ्वी-। सब्ज़ी, सलाद, फल, मेवे, आपका मुख्य आहार होगा। आप सुबह खीरे का जूस लें, खीरा 1/2 भाग +धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है।

दोपहर में 12 बजे फिर से इसी जूस को लें। इसके एक घंटे बाद खाना खाएँ। शाम को नारियल पानी लें फिर 2 घंटे तक कुछ ना लें। रात के सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें, नारियल की गिरि मिलाएँ।लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ।इसे बिना नमक के खाएँ, बहुत फ़ायदा होगा।सेंधा नमक केवल एक बार पके हुए खाने में लें। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ  ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)



05:14 PM | 14-01-2020

Hi. You must work with a Mental Health Coach who can help your son reclaim her mental health. If you would like us to connect you to one, email us at info@wellcure.com.

Regds
Team Wellcure


Wellcure
'Come-In-Unity' Plan