Q&A
09:37 AM | 03-02-2020

I am unable to concentrate while reading? My mind keeps on wandering somewhere else while reading? I HV to read 2-3times coz of that... Wht should I do?


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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3 Answers

06:34 PM | 04-02-2020

Lack of focus and concentration is something that we have to develop over time. The art to focus on is to try small activities without getting distracted. Then it becomes a habit. Check this video from Dandapani. It's going to help you understand https://youtu.be/4O2JK_94g3Y

In addition to this, when the brain is constantly getting messages and various centres of the brain are physically not able to focus, then it could also be because of a lifestyle issue. Body and mind work together and a toxic body leads to a distracted mind too.

Switch to a fully plant-based lifestyle with fruits veggie and greens till dinner for every single meal without having any cooked food. Only for dinner have gluten-free, oil-free food. Drink 1-2 liter of juice and 1-2 liters of water per day. Exercise for an hr daily. Exposure to the sun for 30-40 mins. daily. You will see a lot of progress. Avoid dairy, meat eggs, fish, sugar, fried foods, sweets, outside junk foods.

If you want to talk to me in detail, reach me

Thanks and regards

Be blessed

Smitha hemadri ( Holistic lifestyle coach )



06:27 PM | 04-02-2020

Mind-wandering is often referred to as unrelated thought process, or, colloquially, autopilot, is the experience of thoughts not remaining on a single topic for a long period of time, particularly when people are engaged in an attention-demanding task. The mind always tends to get distracted and people are unable to concentrate.

The process of inhibiting executive functions that control attention and thought processes. This failure of cognitive inhibition which is said to be a direct cause of the mind-wandering problemMind-wandering problem is also connected to working memory capacity (WMC). 

Some natural ways to get rid of it, namely:

  • Stay active and cultivate a habit of regularly exercising, which is good for your physical and emotional health.
  • Don't drink alcohol. Alcohol is considered to be a natural sedative and avoiding it is the best.
  • Stop smoking and social drugs. Consumption of these could increase anxiety-related ailments.
  • Stop consumption of tea or caffeine.
  • Get some sleep. Some improper sleep patterns could increase the problem. It is very essential for a normal individual to have at least 7- 8 hours of sound sleep.
  • Yoga and Meditations could be beneficial. There are some specialized practices that could be practiced under the guidance of a well-trained yoga teacher.
  • Eat a healthy diet. Consumption of less oil, white food items ( white sugar, maida, salt) sugared drinks, junk foods, spices could also benefit.
  • Practice deep breathing along with pranayama could reduce anxiety to a great level
  • Also if possible talk to friends or take help from a psychologist or psychiatrist who could guide in a proper way.

Here are some of the additional tips to overcome negative thoughts:

  • Sit in a quiet place and listen to mind soothing music.
  • Read books of your choice.
  • If you have a flair towards art, painting or any other hobbies like photography, travel, etc.could be a great choice as well.
  • Keep your living area well ventilated and let the sun come in if you have a choice for that.
  • Have good sleep and keep yourself relaxed.
  • Keeping your living area clean and tidy also works wonders.
  • Keep friends for socializing and this could help a lot.
  • Light some scented candles and breathe deeply and meditate if possible.
  • Gardening, cooking, pets, etc are stress buster activities that could also play a vital role in the removal of negative vibes.

Specific Practice:

Mediation or Eye Exercises ( tratak and dhristis ) are said to be powerful techniques to master the mind and improve concentration levels if practiced under a trained yoga therapist.



07:00 PM | 03-02-2020

हेलो,

कारण -  आपके मन और दिमाग में भी असीम  शक्ति है, लेकिन यह सभी दिशाओं में विलुप्त हो जाती है। दिमाग किसी एक विषय पर गहराई पर सोचने या केन्द्रित होने  की बजाय, एक ही समय पर  अलग-अलग चीजों के बारे में सोचता है। इसलिए, औसत दिमाग अपनी शक्ति का पूरा उपयोग नहीं करता है। इसे ही हमारी एकाग्रता यानि concentration के नाम से जाना जाता है।

हमारे एकाग्रता में कमी के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि मोबाइल का एक्सपोजर टीवी का एक्सपोजर और कई और माध्यम से हमारा एकाग्रता भंग हो सकता है। मानसिक अध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए शरीर को अंदर से साफ रहना जरूरी है शरीर में अम्ल की अधिकता रहने पर भी हमारी एकाग्रता भटक सकती है। क्योंकि ब्रेन में ऑक्सीजन का संचार ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है। प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाकर एकाग्रता पर भी काम किया जा सकता है क्योंकि यह भी हमारे स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है।

समाधान - 1. प्रतिदिन आप ख़ुद को प्यार दें अपने बारे में 10 अच्छी बातें कोरे काग़ज़ पर लिख कर और प्रकृति को अपने होने का धन्यवाद दें।

2. एकाग्रता के लिए ओम मंत्र का उच्चारण सोने से पहले और सुबह खाली पेट करना लाभदायक होता है।

त्राटक का अभ्यास से भी एकाग्रता बहुत अच्छी हो जाती है। भ्रामरी प्राणायाम भी बहुत ही उत्तम है योगनिद्रा भी सुनना लाभदायक होगा लघु ध्यान योग भी बहुत ही फायदेमंद है। सूर्य नमस्कार 10 बार करने से एकाग्रता बहुत अच्छी होती है। गायत्री मंत्र का उच्चारण बहुत ही प्रभावी है।

3. मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। 

सर पर सूती कपड़ा बाँध कर उसके ऊपर खीरा और मेहंदी या करी पत्ते का पेस्ट लगाएँ,नाभि पर खीरा का पेस्ट लगाएँ।पैरों को 20 मिनट के लिए सादे पानी से भरे किसी बाल्टी या टब में डूबो कर रखें।

4. लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।

जीवन शैली - 1. आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

2.वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

3.अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

4.जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल से गले  पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6.सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

7.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

8. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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