Q&A
10:01 AM | 10-02-2020

How much time is needed to recovery from h pylori completely?


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3 Answers

10:16 AM | 13-02-2020

Hello Arnab,

The prognosis of the disease is highly dependent on how the individual is taking up an active role in nature-based diet and taking step towards a healthy lifestyle so it highly depends from case to case. Maybe it is a long term effect of prolonged exposure to chemicals and adulterated food which have gathered all the levels of toxicity. 

Continuous consumption of fatty diet and highly spiced food leads to the accumulation of toxins that are the primary cause of any health issue. What needs to be taken care of now is the fact that a major change in lifestyle and diet will be the cure of the problem. The lighter the food in its nature the easier it is to absorb but what we do is load ourselves with a lot of high-fat diets and a sedentary lifestyle which only is the result of the accumulation of toxins.

With a healthy change in the diet and your routine, we can easily deal with all the issues related to the problem of poor absorption and indigestion which causes infection. What makes a major difference is by changing lifestyles, that we are not only curing the disease at this stage but also preventing it.

Now let us understand what changes we can make:

Eat:

The first thing in the morning is to start your day with something light in nature and easy to digest is what your breakfast should be because they are the kind of nutrients that get absorbed easily. Even the early morning ritual should include consumption of two-three glasses of warm water will help in flushing out all the toxins.

The ideal diet would be to depend on fruits and raw vegetable intake at least for one month and refrain from something which is oil-based. Have fruit salad in the afternoon time and vegetable salad as evening snack this will be light on your stomach.

Consume Vitamin C rich food as it builds up immunity at the same time clear our airway like mosumbi, oranges, lemon, sprouts, cabbage, capsicum etc. This increases the immunity and hastens the treatment. 

Exercise:

  • Sitting in vajrasana is really helpful to aid digestion.
  • A brisk walk in early morning sun from 30-45 minutes, helps in treating your body to its level best. Sun is a great source of Vitamin D that is why walking in the sun and connecting with the sun also help in activating our cells and rejuvenate us for the whole day.

Meditation:

In any kind of disease, stress comes complementary to it, but with our assurance and positive attitude, we can treat anything. The best thing to start with is breathing mindfully before sleep with the help of music to stay positive.

In a room take a bowl of water and add two-three drops of orange or lavender essential oils this will help in soothing you and the aroma will relax you and keep you away from any kind of disease.

A positive attitude will help you to deal with everything in life.

Sleep:

Sleeping for at least 7-8 hours is really helpful in dealing with any problem, sleep is our body's natural response and helps the body to heal. Sleep relaxes the muscles and strengthens our body. During sleep, our body goes into a repair mechanism where it heals thy self.

Hopefully, these suggestions will help you

Thank you



01:48 PM | 12-02-2020

H.Pylori or Helicobacter Pylori is a bacteria that is present in most of the population. It is estimated that approximately 50% of the world population have this bacteria and in a majority of the cases, they don't cause any harm. However, in some cases, they might cause infections such as Gastritis and in rare cases, it might even cause stomach cancer. Some of the symptoms often noticed in this infection are burning pain the abdomen, bloating, nausea, loss of appetite, frequent burping and unexplained weight loss. Conventional cure goes by the use of antibiotics but most often people experience the side effects of the medications which could complicate the cure and increase the time.

It might be suggested to use some simple natural remedies to manage this condition.

  1. Green tea - Consumption of green tea has always proven effective in the cure of this condition. Research has proven that green tea consumed during infection has reduced the complications of gastritis etc.
  2. Honey - Honey has anti-inflammatory properties. It might be effective in reducing the effects of infection.
  3. Olive Oil - Olive oil has proven effective in reducing the infection in this health condition. The anti-inflammatory properties in olive oil act against the infection.
  4. Broccoli Sprouts - It is believed that an enzyme present in broccoli sprouts act this bacteria which could help in faster cure.
  5. Liquorice root - Licorice roots have proven effective against the H pylori bacteria and aids in faster cure

The exact duration taken for the complete cure might differ from case to case. It would be best advised that conventional and natural remedies could effectively work together and reduce the time taken to cure the infection.



02:09 PM | 11-02-2020

हेलो, 

कारण - h पाइलोरी एक आम प्रकार के बैक्टीरिया होता है, पाइलोरी" भी कहा जाता है।  पाइलोरी  पेट व आंतों में संक्रमण पैदा कर देता है, जिससे आंतों व पेट में अल्सर बनने लगते हैं। यह आंतों में इन्फ्लेमेशन के कारण होता है।  खाना जो देर तक प चता नहीं है और शरीर के अंदर काफी लंबे समय तक सड़ रहा होता है उसके वजह से यह संक्रमण होता है। विषाणु को पनपने के लिए शरीर में अम्लीयता होना जरूरी होता है। आहार शुद्धि और प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाकर इसे छुटकारा पाया जा सकता है।

समाधान- 1. जितना हो सके कच्चे हरे पत्तों का जूस छानकर पिए। जैसे पालक, दूब घास, बेलपत्र, धनिया पत्ता, तुलसी का पत्ता इन्हें अलग-अलग टाइम पर पीसकर 200ml पानी मिलाकर छानकर पीएं खाली पेट इन पत्तों का जूस बहुत ही ज्यादा लाभदायक होता है। यह रक्त को शुद्ध करेगा।

 2. 20 मिनट सूर्य की रोशनी में अपने शरीर को रखें सिर और आंख को किसी सूती कपड़े से ढक करके 5 मिनट बैक 5 मिनट फ्रंट 5 मिनट लेफ्ट 5 मिनट राइट साइड धूप लगाए। धूप लेट कर लगाने से ज्यादा फायदा करता है।

ऐसा करने से शरीर में पल रहे विषाणु मूर्छित हो जाएंगे।

 3. पेट के ऊपर एक गिला कपड़ा लपेट कर रखें 20 मिनट तक उसको लपेटे रखें इससे आंत को ठंडक पहुंचेगी और विषाक्त कणों को निष्कासन में मदद मिलेगा।

4. हर 3 घंटे में लंबा गहरा श्वास अंदर लें उसको थोड़ी देर रोकें और फिर सांस को खाली करें। खाली करने के बाद फिर से रुके और फिर लंबा गहरा सांस ले। यह एक चक्र है ऐसा दिन में 10 चक्र करें केवल एक शर्त का पालन करें जब आप लंबा गहरा सांस ले रहे हैं तो अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें ऐसा करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का बढ़ेगी और ऑक्सीजन का संचार सुचारू रूप से हो पाएगा।

जीवन शैली - 1. आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

2.वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

3.अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

4.जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल रीढ़ की हड्डी पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6. एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

7. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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