04:29 PM | 13-02-2020

Is Vajrasana suitable for me because orthopaedic surgeon advised me not to put the pressure on my joints as l am at the beginning of arthritis? My age is 58+ and weight is 58 kgs. Can you pls suggest?

The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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4 Answers

02:36 PM | 14-02-2020

Hello User,

The reason our body works in harmony is because of the fact that the fluid is present in the body, this acts as grease in the body which tends to make sure that all the organs have a smooth flow in function. The knee cap gets disturbed due to the fact that the cartilage is not getting a sufficient amount of fluid in the knee region. So, our main focus is to make sure that our body gets fluid. A good amount of water is needed in the body, the blood present is 5-6 litres so at least that much of water is needed in the body. Start storing the water in copper bottles so as to make sure we get a good amount of copper. Copper is the required mineral which helps in treating fluid. Calcium is another mineral which is needed in this stage to make sure our bones is working in harmony, calcium helps in treating all the disease related to grow and wear tear of our tissues, so the good source of calcium are green leafy vegetables, because not only they are easily absorbed in the body but also we can rely on the plant vegetables for not producing toxicity in the body. Seeds are another good source of calcium, for example, flax seeds.


When we eat the right kind of food at the right time we make sure that it is easily absorbed.

  • Let us starts your day with a good amount of water, 2-3 glasses of warm water help in flushing out the toxins. This toxins which come and make our immunity vulnerable to diseases needs to be flushed.
  • Your breakfast should comprise of something light, a fruit bowl and after some time a vegetable juice is easy to digest. This will help in the absorption of nutrients easily.
  • The consumption of seeds after lunch like a mouth freshener is a very good chance of dealing with it,https://www.wellcure.com/recipes/614/seedy-health-mouth-freshenerthis is a good way you can rely on to consume seeds.
  • After in evening time, roasted dried fruits, makhanas, corn, sprouts, are a good choice of snacks.


Vajrasana, when done in the right manner, does not put any pressure on the knees in any way. Sit erect with your bottom completely resting on your feet rather than bending forward and putting pressure on knees, vajrasana helps in digestion sitting in this posture will help in treating any issue related to GUT and harmonise health. Let us start with dealing with the exercise part in a broader spectrum, exercising will not only help you in bringing back the comfort but also get a good amount of exercise.

1. After sitting on a chair, raise your legs at a right angle one by one and do it continuously, for 25 times. Do it with one long breath at a time.

2. A brisk walk is something which you can do daily without getting knee pain.

3. By sleeping on your back, you do leg raise alternately, this will put more pressure on the muscles.

With the help of these guidelines, you will surely be able to work on your knee gap and your exercises will be fruitful without discomfort or pain.


  • Practice mindful meditation.
  • Deal with your stress.
  • Allow positivity to be part of your life.

Doing a 15-minute exercise before sleep like deep breathing will help in relaxing your mind, you can use music also for relaxation. A calm mind will lead to a healthier body.


Getting 7-8 hours of sleep is very essential for the body, during sleep our body repairs itself and rejuvenates us for the whole day.

Hopefully, these suggestions will help you.

Thank you

02:36 PM | 14-02-2020


कारण - दर्द में वज्रासन में बैठ ना ठीक नहीं है ऐसा करनेेे से समस्या बढ़ सकती है। गठिया के दौरान आपके जोड़ों में सूजन होती है जिसके कारण जोड़ों में दर्द, कठिन काम करने में परेशानी और जोड़ों में अकड़न आदि समस्याएं होती हैं। इन समस्याओं के कारण आपकी दिनचर्या प्रभावित होती है। दर्द का मुख्य कारक हमारे शरीर में अम्ल की अधिकता है। प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाकर स्वस्थ हो सकते हैं

समाधान -

1. गहरे हरे रंग के पत्तों का जूस बहुत ही फायदेमंद है 25 से 30 ग्राम पालक के पत्ते या धनिया के पत्ते या पुदीना के पत्तों को पीसकर उसमें 200 ml पानी मिलाएं। खाली पेट इसको पिए यह काफी लाभकारी है इसके जगह पर दूब घास, बेलपत्र, का जूस भी बहुत लाभकारी है

2. सूरज की रोशनी में सर और आंख को ढककर 20 मिनट के लिए लेटे पांच 5 मिनट आगे 5 मिनट पीछे 5 मिनट दाएं 5 मिनट बाएं धूप की रोशनी लें। यह प्रक्रिया इस रोग में काफी लाभकारी साबित होगा।

3. मानसिक और शारीरिक क्रियाओं में संतुलन लाए। पश्चिमोत्तानासन, वीरभद्रासन, अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम

 शवाआसन, फायदेमंद है। प्रतिदिन आधे घंटे के लिए इन क्रियाओं में संलग्न हो। इससे रक्त संचार और ऑक्सीजन का संचार में वृद्धि होगी।

अपने खाने में सेंधा  नमक दिन में एक बार केवल पके हुए खाने में लें। क्योंकि नमक शरीर के मिनरल  को सोख लेती है।

खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं। शरीर में अम्ल की कमी होगी।

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। ऐसा करने से रक्त संचार में सुधार आएगा।

जीवन शैली - 1आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

2.वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

3.अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

4.जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल से दर्द वाले उस हिस्से की मालिश करें जहां पर समस्या है।  घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है।

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6.सेंधा नमक केवल एक बार पके हुए खाने में लें। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

7.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

8.उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।



प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)

11:17 AM | 14-02-2020

Dear user,

Let's begin by guiding you to a few resources on Wellcure. We strongly suggest you read the below: 

As per nature cure, the aim is to look for and get rid of the root cause of pain/discomfort/symptoms instead of merely managing symptoms. Adopting a natural help style can help you work towards preventing/getting cured. You may consult a Nature Cure expert through our Nature-Nurtures Program who can help your wife in making the transition to a natural lifestyle, step by step. 

Wishing you good health!

Team Wellcure

10:51 AM | 14-02-2020

In recent years, though yoga has been shown to help improve various bodily systems where it increases the range of movements and maintains the optimum health of joints. The benefits of yoga for seniors, in particular, include improved mobility, reduced fear of falling, and enhanced quality of life. However, taking consideration of the medical advice you have received it would be best to avoid Vajrasana. If possible if you are able to do Sukhasana would be better.

In case of arthritis, It might be advised to try some Sukshma Vyama or loosening exercises, under expert guidance. care should be taken either not to strain or achieve a final posture. It must be best to perform whatever poses are possible could be done and you may repeat the posture which could also benefit and help in the treatment of the problem.

Alternatively, you may consider doing some lifestyle changes along with conventional therapies which could improvise the quality of cure in patients suffering from this ailment. Taking natural therapies is always considered to be safe and no side effects and hence most Orthopedicians recommend multi-therapy modality in the management of this condition. In some cases, this therapy model could even prevent the complications of this ailment getting worsened and could cease the ill effects of the complications if detected and managed in early stages.

Some ways to manage along with the conventional therapies

  1. Knee pack – It is a simple procedure that could be done at home. Take a cold cotton cloth and soak it in water and then squeeze water out of it and then wrap it over the knees. A woollen flannel is wrapped over the wet cotton cloth and keep it for 45 min to 1 hr. This treatment could be undertaken while relaxing or watching TV or reading a book.
  2. Hot & Cold Fomentation – Hot and cold compress could be beneficial to reduce pain and also stiffness.
  3. Hot Water Pouring – Simply pouring tolerable hot water over the knees could work as a pain-relieving measure to bring down the pain and stiffness
  4. Massage Therapy – partial massages followed by local steam could be the best pain relief measure.
  5. Yoga Therapy – Loosening exercises could loosen the joints and reduce stiffness.
  6. Diet – Consume a lot of broccoli, citrus fruits, garlic (contains diallyl disulfide, which may reduce cartilage damage), green tea, nuts, plant-based oils made from avocado, olives, safflower, and walnut.
  7. Get exposed sunlight – Sunlight is the natural source of Vit D and that is sourced from sunlight, hence exposure to sunlight could be more effective in this case.

Following Natural therapies could benefit in the pain management and also in increasing the mobility of joints in the arthritic conditions

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