11:53 AM | 13-04-2020

पानी कितना पीना चाइए रोज 5-6 लीटर या इससे भी ज्यादा?

The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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4 Answers

07:05 PM | 13-04-2020

Hello Gaurav,

The ideal way of drinking water should be dependent on your lifestyle, activity, weight, and size. According to this, you will get to know how much water intake is ideal for you.

Normally due to our body containing 5-6 liters of water because blood present in the body is of that much quantity, to purify our blood daily it is recommended to drink that much water. There are various sites on the internet, which will help you in calculating your ideal water intake according to your body weight.

With water intake, make sure you take time to sit in the adequate sunlight, meditate and have a good sleep. These all are a recipe for ideal health.

Hopefully, this suggestion helps you.

Take care.

12:11 PM | 14-04-2020

Dear Gaurav,

We appreciate that you put up this very basic but very important question on the forum. As per Nature Cure, it is important to stay hydrated. The best way to keep your body hydrated is to take water through natural foods i.e in the form of fruits and veggies as these are water-rich. When your diet is rich in such foods you would automatically feel less requirement to drink water otherwise.

On the contrary, if your diet lacks such food and is rich in fried, processed, refined or other unnatural foods your body gets de-hydrated and hence thirst is induced. However, drinking too much water is not advisable as it taxes the eliminatory organs. Therefore, it is best to ensure that you take more of natural foods and drink water as your body requires and not as per any standard guideline.

Hope we have been able to address your query satisfactorily. You can know more by reading these blogs:

  1. Drinking water - the natural approach
  2. Are you eating water or drinking it?


Team Wellcure

09:43 PM | 13-04-2020

Let your body decide

How much water one should take varies from person to person. You can discover the ideal quantity for you by observing yourself. When you feel dehydrated or tired, it is an indication of the body needing water. However, we also need to know that there are better sources of water like the water we get from vegetables and fruits to stop, especially the vegetable juices. These are the best alkaline water, which not just going the thirst; it can also provide the body with the required minerals and helps in keeping the body adequately hydrated.

Sip it

The other important thing to note is to sip it and not drink the water in one go. Even water has to follow the same path, just that the process is different as it is absorbed in the body system instead of being digested.

Practice Yogasanas and pranayama

As the days are getting hotter, the need for water will rise as the body tries to maintain the optimum temperature by keeping the outer skin cool with sweat. If we can support the body with some of the correct practices like asanas that take care of excess heat in the body and the pranayama, it will be good.

In Asanas, Shashank asana (rabbit pose), makarasana (crocodile pose), Sukhasana (Comfort pose) help in cooling the body temperature and also in calming it down. The pranayama of Sheetali and Sheetkari are also very useful in containing the thirst to some extent. In Sheetali, the mouth should remain open, and lips stretched out while upper teeth firmly placed on the lower teeth. Inhale from the mouth and close the mouth and exhale through the nose. Do it for ten rounds Sheetkaari is its variation. These are very effective in containing the water requirement.

03:46 PM | 13-04-2020

कारण - प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार अधिक पानी पीना या  बिना प्यास के पानी पीना स्वास्थ्य कर नहीं है। पानी की जरूरत हमारे गले को होती है गले की जरूरत को पूरा करने के लिए मुंह में पानी का घूंट भरें। 40 गिनती गिनने तक मुंह में रखे। उसके बाद पानी को गट करें। ताकि उसमें सलाइवा मिक्स हो सके। आपके शरीर के लिए फायदेमंद है लेकिन तीन से चार या 5 लीटर पानी शरीर के लिए फायदेमंद नहीं है उसे शरीर को कोई भी फायदा नहीं पहुंचता है बल्कि नुकसान होता है। पानी फल और सब्जी में 90% होता है। फल और सब्जी के जरिए जो पानी शरीर में जाता है उसको पचाने में शरीर को मेहनत नहीं करना पड़ता है और उसका वेस्टेज बहुत कम होता है। यानी उससे मूत्र ज्यादा नहीं बनता है लेकिन शरीर की पानी की जरूरत पूरी हो जाती है। इसकी जगह पर अगर पानी पीते हैं तो पानी का वेस्टेज 90% होता है। शरीर को उसका पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। 

किडनी और यूरिनरी ब्लाडर पर इसका खराब असर पड़ता है।

समाधान - 1.पानी का प्रयोग हाइड्रोथेरेपी के द्वारा किया जाता जा सकता है जो कि शरीर को सबसे अधिक फायदा पहुंचाता है।

2 . फल सब्जी का सलाद कच्ची सब्जी का जूस यह पानी को है कोहेसिव वाटर कहा जाता है। अमृत पेय क्योंकि यह शरीर पर किसी भी तरीके का प्रेशर दिए बिना शरीर की जरूरतों को पूरा करता है।

जीवन शैली - शरीर पाँच तत्व से बना हुआ है प्रकृति की ही तरह।

आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी ये पाँच तत्व आपके शरीर में रोज़ खुराक की तरह जाना चाहिए।

पृथ्वी और शरीर का बनावट एक जैसा 70% पानी से भरा हुआ। पानी जो कि फल, सब्ज़ी से मिलता है।

1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें।

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।I

दौड़ लगाएँ। सूर्य नमस्कार 5 बार करें।

3 अग्नि तत्व- सूरर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें और खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा करना है।

नीम के पत्ते का पेस्ट अपने नाभि पर रखें। 20मिनट तक रख कर साफ़ कर लें।

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं।

मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें।

पेट पर खीरा का पेस्ट 20 मिनट लगाएँ। फिर साफ़ कर लें। पैरों को 20 मिनट के लिए सादे पानी से भरे किसी बाल्टी या टब में डूबो कर रखें।

5. पृथ्वी तत्व- कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है।  सुबह ख़ाली पेट इनमे से कोई भी हरा जूस लें।पेठे (ashgourd ) का जूस लें और  नारियल पानी भी ले सकते हैं। बेल का पत्ता 8 से 10 पीस कर 100ml पानी में मिला कर छान कर पीएँ। खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ।

ये जूस सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले लें। नाश्ते में फल लें। दोपहर के खाने से एक घंटा पहले हरा जूस लें। खाने में सलाद नमक सेंधा ही प्रयोग करें। नमक की पके हुए खाने में भी बहुत कम लें। सब्ज़ी पकने बाद उसमें नमक डालें। नमक पका कर या अधिक खाने से शरीर में (fluid)  की कमी हो जाती।

सलाद दोपहर 1बजे बिना नमक के खाएँ तो अच्छा होगा क्योंकि नमक सलाद के गुणों को कम कर देता है। सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल (yellow pumpkin) 50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgourd) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी लें।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लें। रात 8 बजे के बाद कुछ ना खाएँ, 12 घंटे का (gap) अंतराल रखें। 8बजे रात से 8 बजे सुबह तक कुछ नहीं खाना है।

6.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस (solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ  ले सकते हैं। जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।



प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)

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