Q&A
10:38 AM | 09-09-2019

How to take convolecence course Naturally after recovery of Chronic Disease like Fever , Dangue , Jaundice or such weakness causing Illness?


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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3 Answers

06:40 PM | 09-09-2019

नमस्ते,
    * अधिकतर अम्लीय भोजन लेने की वजह से शरीर में वर्ज्य पदार्थ इकट्ठा होने लगते हैं जिससे रक्त का पीएच अम्लीयता की ओर होने लगता है और हम रोग ग्रस्त हो जाते हैं,
 

    *    यदि हम अपने भोजन में 80%फल व सब्जियों का सेवन करें, तो हम रोगी नहीं होंगे,

 

  *   रोग की अवस्था में पर्याप्त मात्रा में क्षारीय फल व सब्जियों का सेवन ,योग व  प्राकृतिक चिकित्सा ही हमें रोगमुक्त कर देता है !

 

*(प्रतिदिन प्रातः काल 5:00 से 7:00 के बीच )कपालभाति ,अनुलोम विलोम ,भस्त्रिका, भ्रामरी प्राणायाम ।

 

*योगिक क्रिया  - जलनेति ,सूत्र नेति, वमन धौति ,त्राटक,

 

*(प्रातः काल 5:00 से 7:00 के बीच) गुनगुने पानी नींबू और *शहद का पर्याप्त मात्रा में सेवन,

 

*नींबू पानी और शहद का एनिमा,

 

*पेट व माथे पर मिट्टी की पट्टी,

 

*क्रमिक ठंडा गरम कमर  का स्नान,

 

*पूरे शरीर की मालिश व वाष्प स्नान,

 

*पूरे शरीर का मिट्टी स्नान,

 

*(प्रातः 7:00 से 9:00 के बीच में) नींबू, संतरा ,लौकी ,कद्दू , अनार ,मौसमी,पालक, गेहूं के ज्वारा ,पपीता का जूस !

 

*(प्रातः 9:00 से 11:00 के बीच) पपीता ,आम ,केला, अनन्नास ,सेव नाशपाती ,अंगूर का  फल सलाद, चुकंदर, शलजम,

 

*हरी पत्तेदार सब्जियां - चौलाई,पालक, लौकी ,कद्दू ,गोभी, टमाटर, करेला, भिंडी, (सायं 5:00 से 7:00के बीच)

 

*भोजन को खूब चबा चबाकर खाएं,

 

*भोजन से 30 मिनट पहले वह 90 मिनट बाद जल का सेवन करें,

*रात्रि को बाई करवट ,स्वच्छ ,हवादार कमरे में सोएं,

 

#निषेध - तली भुनी,डिब्बाबंद ,नमक, नमकीन, ठंडे पेय पदार्थ ,मिठाईयां ,नशा- शराब, गुटखा ,पान मसाला, सिगरेट, क्रोध ,ईर्ष्या, चिंता से बचे ! 

 

नोट -समस्त योग व प्राकृतिक उपचार कुशल व अनुभवी योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक के निर्देशन में ही ले !

 

 

                            डॉ. राजेश कुमार 

                       योग व नेचुरोपैथी फिजीशियन

 

 

 

 

 

 

      
 

09:51 PM | 09-09-2019

बहोत बहोत धन्यवाद

Reply


04:57 PM | 10-09-2019

 Prevention:- Body eliminates via such fevers if it had a toxic overload. The toxic accumulation would have attracted scavengers to feast on it. That explains the fever. That’s one reason why everyone does not get the same fever in the same house. It’s something we can prevent if we keep the body clean. Fevers happen if the body cannot eliminate naturally via the excretory organs and it’s busy digesting food all the time.

During a fever http://www.wellcure.com/body-wisdom/278/practical-tips-for-handling-fever-in-children

Post recovery care :- body would be weak and if it shows signs of hunger, feed it fruits in all forms. Continue on easy to digest foods for sometime till you feel normal. Rest as much as possible. Exposure to sun will help. 

Thanks and let us know if you have any questions,

Be blessed

Smitha Hemadri (educator of natural healing practices)



04:56 PM | 10-09-2019

नमस्ते

 

शरीर को यह ज्ञान है कि ख़ुद को स्वस्थ कैसे रखना है। हम इस बात से अनभिज्ञ हैं। जब हमारी प्राणशक्ति हमें ऊर्जा दे रही होती है तो वह स्वास्थ्य की स्तिथि है। जब हमारी प्राण शक्ति हमारे शरीर के अंदर विषाणुओं (toxic) को साफ़ करने में लग जाती है तो वह अस्वस्थ होने की स्तिथि होती है।

शरीर पाँच तत्व से बना हुआ है प्रकृति की ही तरह।

आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी ये पाँच तत्व आपके शरीर में रोज़ खुराक की तरह जाना चाहिए।

पृथ्वी और शरीर का बनावट एक जैसा 70% पानी से भरा हुआ। पानी जो कि फल, सब्ज़ी से मिलता है।

1 आकाश तत्व- एक खाने से दूसरे खाने के बीच में विराम दें। रोज़ाना 15 घंटे का उपवास करें जैसे रात का भोजन 7 बजे तक कर लिया और सुबह का नाश्ता 9 बजे लें।

2 वायु तत्व- लंबा गहरा स्वाँस अंदर भरें और रुकें फिर पूरे तरीक़े से स्वाँस को ख़ाली करें रुकें फिर स्वाँस अंदर भरें ये एक चक्र हुआ। ऐसे 10 चक्र एक टाइम पर करना है। ये दिन में चार बार करें।I

खुली हवा में बैठें या टहलें।

3 अग्नि तत्व- सूरर्य उदय के एक घंटे बाद या सूर्य अस्त के एक घंटे पहले का धूप शरीर को ज़रूर लगाएँ। सर और आँख को किसी सूती कपड़े से ढक कर। जब भी लेंटे अपना दायाँ भाग ऊपर करके लेटें ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय रहे।

4 जल तत्व- खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें और खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा करना है।

नीम के पत्ते और खीरे का पेस्ट अपने नाभि पर रखें। 20मिनट तक रख कर साफ़ कर लें।

 

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें।

5. पृथ्वी तत्व - कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। अगले सुबह ख़ाली पेट इनमे से कोई भी हरा जूस लें।पेठे (ashguard ) का जूस लें और  नारियल पानी भी ले सकते हैं। बेल का पत्ता 8 से 10 पीस कर 100ml पानी में मिला कर छान कर पीएँ। खीरा 1/2 भाग + धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ।

ये जूस सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले लें। नाश्ते में फल लें। दोपहर के खाने से एक घंटा पहले हरा जूस लें। खाने में सलाद नमक सेंधा ही प्रयोग करें। नमक की पके हुए खाने में भी बहुत कम लें। सब्ज़ी पकने बाद उसमें नमक डालें। नमक पका कर या अधिक खाने से शरीर में (fluid)  की कमी हो जाती।

सलाद दोपहर 1बजे बिना नमक के खाएँ तो अच्छा होगा क्योंकि नमक सलाद के गुणों को कम कर देता है। सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashgurad) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी लें।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लें। रात 8 बजे के बाद कुछ ना खाएँ, 12 घंटे का (gap) अंतराल रखें। 8बजे रात से 8 बजे सुबह तक कुछ नहीं खाना है।

एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ  ले सकते हैं।

जानवरों से उपलब्ध होने वाले भोजन वर्जित हैं।

तेल, मसाला, और गेहूँ से परहेज़ करेंगे तो अच्छा होगा। चीनी के जगह गुड़ लें।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

धन्यवाद।

रूबी

 

 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)

 


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