Q&A
12:22 PM | 26-06-2020

Hi, I have query regarding my health issues. I have stone in my gall bladder 18 mm but I don’t have any problem due to stone like pain, nausea etc. I had PCOS now it’s cured and don’t have any problem in periods. Now my concern is mostly in evening I feel empty under my sternum in between the ribs and feel heavy( no pain and other symptoms) if I have antacid or sugar it stops hurting me. Please suggest me what can I do?


The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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3 Answers

10:40 PM | 29-06-2020

Hello sukhpreet,

Gall bladder stone usually results due to increased cholesterol levels in the bile or concentrated bile in the gall bladder which is due to an improper lifestyle, wrong eating habits, and wrong sleeping pattern. 

Diet

  • Start the day with 3 to 4 glasses of warm water. This will help to flush the toxins out of the body. 
  • Drink freshly prepared homemade fruit juices regularly. 
  • Eat light and plant based foods.
  • Have salads, sprouts, nuts, and dry fruits. 
  • Drink coconut water daily. 
  • Have fresh, seasonal, and locally available fruits and vegetables. 
  • Eat blueberries, amla, banana, and pomegranate.
  • Drink plenty of water during the day. 

Yoga and pranayam 

  • Do 12 sets of suryanamaskar daily. 
  • Perform padahasta asana, trikona asana, gomukha asana and parvat asana. 
  • Do pranayam regularly, specially anulom-vilom, kapalbhati and bhastrika pranayam. 

Sleep 

Sleeping is very essential to maintain the circadian rhythm. So, take proper sleep of at least 8 to10 hours daily. Sleep early at night and also wake up early in the morning. 

Thank you 



10:41 PM | 29-06-2020

Hello Sukhpreet, 

Due to less healthy fluid intake and indulging in unhealthy beverages, our body goes into inflammation. Also in the background, when we chronically have a high-fat diet and sedentary lifestyle, which ultimately causes inflammation leading to gall bladder problems. Stones up to 6-10 mm can be very well removed with natural methods. With this number of the stone ureter, diameter becomes small which tends to be difficulty in passing. 

To treat this problem we should start with a light diet. In this case, only a multidimensional cure can help you. The main thing here is, it should be about everything, food, meditation, sleep, and exercise which amalgamate for good health.

Eat:

The first thing in the morning is to start your day with something light in nature. Easy to digest is what your breakfast should be because they are the kind of nutrients that get absorbed easily. Even the early morning ritual should include consumption of two-three glasses of warm water will help in flushing out all the toxins.

The ideal diet would be to depend on fruits and raw vegetable intake for at least one month and refrain from something oil-based.

  • One inch of ginger boiled in two cups of water with one tablespoon lemon, boil them for 5-10 minutes. Consume this mixture two hours after the noon meal will help in treating inflammation.
  • Cumin water helps in treating the digestive tract.
  • Cinnamon water is healthy and helps in keeping the digestive system smoothly functioning.

​​Exercise:

  • Pranayam helps in detoxifying the body. Practising it early morning in an area that has good sunlight will help in improving blood circulation.
  • Suryanamaskar, daily 12 sets will help in increasing the blood circulation of your body.
  • Halasana, Bhujangasana, Dhanurasna, practice it daily before the session of suryanamaskar, this will aid in treating gall bladder stones.

Meditation:

In any kind of disease, stress comes complementary to it. But with our assurance and positive attitude, we can treat anything. The best thing to start with is breathing mindfully before sleeping with the help of music to stay positive. In a room take a bowl of water and add two-three drops of orange or lavender essential oil. This will help in soothing you and the aroma will relax you and keep you away from any kind of disease.

Use a 15-minute relaxation technique before sleep by hearing a piece of soothing music and deep breathing will help in relaxing your mind.

A positive attitude will help you to deal with everything in life.

Sleep:

Sleeping for at least 7-8 hours is really helpful in dealing with any problem. Sleep is our body's natural response and helps the body to heal. Sleep relaxes the muscles and strengthens our body. During sleep, our body goes into a repair mechanism where it heals itself.

Hopefully, these suggestions will help you.

Thank you.



10:27 PM | 29-06-2020

हेलो,
कारण - 1. पित्ताशय की पथरी (Gallstones) क्रिस्टल जैसा पदार्थ होता है, जो पित्ताशय में बनने लगता है। पित्ताशय की पथरी पित्ताशय में बिना किसी प्रकार के दर्द व अन्य लक्षण पैदा किए रह सकती है या यह पित्ताशय की दीवारों को उत्तेजित कर सकती है व पित्त नलिकाओं को बंद कर सकती है। इसके कारण संक्रमण, सूजन व जलन और ऊपरी पेट में दर्द हो सकता है। यह भी संभव है कि संक्रमण पित्ताशय या अग्नाशय से लीवर में फैल सकता है। 
खराब हाजमा और निष्कासन में अवरोध उत्पन्न होने ऐसा होता है। 
2 पीसीओएस से ग्रस्त होने पर सामान्य से ज़्यादा स्तर में एण्ड्रोजन का उत्पादन होता है। यह ओव्यूलेशन (Ovulation) के दौरान अंडे के विकास और रिलीज को प्रभावित कर सकता है। अतिरिक्त इंसुलिन (एक हार्मोन जो शर्करा और स्टार्च को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है) अधिक एण्ड्रोजन स्तर का कारण हो सकता है।
खराब हाजमा इसका मूल कारण है।
3. पसलियां वो घुमावदार हड्डियां होती हैं जो आपकी रीढ़ की हड्डी से आपकी छाती के चारों ओर जाती हैं। पसलियों का भारीपन और असहजता  छाती में या उसके नीचे या नाभि के ऊपर महसूस हो सकता है।

म्यूकस में संक्रमण का पहचान है आपके शरीर में म्यूकस इंफेक्शन है। यह आंत के संक्रमित होने पर होता है।शरीर में अम्ल की अधिकता होने पर संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है।प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाकर पूर्ण स्वास्थ्य का लाभ उठा सकते हैं।

समाधान- 1. ऐसा खाना जो कि देर तक पछता नहीं है उसका त्याग करें। जैसे दूध, गेहूं, मैदा, रिफाइंड नमक और रिफाइंड शुगर और पैकेट फूड।

फल, सब्जी, और कच्ची सब्जी का जूस को प्रतिदिन ले।

ऐसा करने से पाचन शक्ति मजबूत होगा और आंतों की सफाई हो पाएगी। 

2.  सूर्य की रोशनी में 20 मिनट का स्नान सूर्य की रोशनी से करें 5 मिनट सामने 5 मिनट पीछे 5 मिनट दाएं 5 मिनट बाएं भाग में धूप लगाएं। धूप लेट कर लेना चाहिए धूप की रोशनी लेते वक्त सर और आपको किसी सूती कपड़े से ढक ले। नारी मंद होने पर  इन्फेक्शन अधिक होता है अतः आप जब भी सोए अपना दायां भाग ऊपर करके सोए। 

3. प्रतिदिन अपने पेट पर खाने से 1 घंटे पहले या खाना खाने के 2 घंटे बाद गीले मोटे तौलिए को लपेटे एक तौलिया गिला करके उसको निचोड़ लें और हूं उस तौलिए को 20 मिनट तक अपने पेट पर लपेटकर रखें ऐसा करने से आपका पाचन तंत्र दुरुस्त होगा।

 अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल रीढ़ की हड्डी पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

4. हर 3 घंटे में लंबा गहरा श्वास अंदर लें उसको थोड़ी देर रोकें और फिर सांस को खाली करें। खाली करने के बाद फिर से रुके और फिर लंबा गहरा सांस ले। यह एक चक्र है ऐसा दिन में 10 चक्र करें केवल एक शर्त का पालन करें जब आप लंबा गहरा सांस ले रहे हैं तो अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें ऐसा करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का बढ़ेगी और ऑक्सीजन का संचार सुचारू रूप से हो पाएगा।

5.सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ashguard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100 ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ash guard) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6. एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर  खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

7. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200 ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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