Q&A
08:36 AM | 15-09-2020

Hello sir/madam. I am recovering from viral fever and observing a lot of backache. Please suggest what can be done. Also I have mild chest congestion. Please suggest

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2 Answers

05:26 PM | 15-09-2020

Hello User,

With symptoms, you are mentioning like chest congestion and fever this can be recovery lethargy from viral fever which is increasing due to both factors the pollutants in the environment and toxicity increases in our body where it becomes vulnerable to the environment.

It is time to take some early measure to deal with fever:

1. Back massage as this pain is due to muscle fatigue caused by fever.

2. Turmeric, ginger, and garlic are the prime things that help in dealing with inflammation and fever reactions of the body.

3. Tulsi, our very ancient Indian herb helps in dealing with viruses that are harmful in the body.

Keep yourself healthy and warm this season by following a natural plant-based diet.

Thank you



09:39 PM | 17-09-2020

हेलो,
कारण - मौसमी बुखार के बाद पीठ दर्द और छाती में जकड़न का कारण हैैै ऑक्सीजन  संचार ठीक प्रकार से शरीर मेंं ना हो पाना। ऑक्सीजन और रक्त संचार में कमी का कारण शरीर में अम्ल की अधिकता है। उत्तम स्वास्थ्य हेतु प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाएं।

समाधान -1. मेरुदंड स्नान काफी लाभकारी होता है, यह हमारे स्नायु तंत्र को स्वस्थ रखता है । एक मोटा तोलिया लेकर उसको भिगो दें बिना निचोड़े योगा मैट पर बिछाए और उसके ऊपर कमर से लेकर के कंधे तक का हिस्सा रखें। उस गीले तौलिए पर रहे 20 मिनट के बाद इसको हटा दें। ऐसा करने से आप का मेरुदंड में ब्लड और ऑक्सीजन का सरकुलेशन ठीक हो जाएगा। 

2. प्राणायाम करना है। लंबा गहरा श्वास अंदर लें रुको थोड़ी देर सांस को पूरी तरीके से खाली करें और फिर रुके थोड़ी देर ऐसा करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन का सरकुलेशन ठीक हो जाएगा ।

3.  नाभि पर खीरा का पेस्ट लगाएँ। पैरों को 20 मिनट के लिए सादे पानी से भरे किसी बाल्टी या टब में डूबो कर रखें। अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल रीढ़ की हड्डी पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

4. खानपान में मुख्य रूप से गहरे हरे रंग के पत्तों का जूस बहुत ही फायदेमंद होता है। गहरे हरे रंग के पत्तों में क्लोरोफिल होता है और ऑक्सीजन की संचार में यह बहुत ही मददगार साबित होता है। 

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे  (ashgourd ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल (yellow pumpkin) 50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ashguard) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस  (solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

7. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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