03:35 PM | 18-04-2020

I was diagnosed with bronchial asthma. I have UTI and a 4. 5 mm kidney stone which results in vomiting and gastroenteritis. Recently, I took 10 antibiotic injections i. V. As i wasn't able to digest anything. I'm prohibited to take sour n cold food. Please suggest the food I can eat.

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2 Answers

04:33 PM | 22-04-2020

Hello Bushra,

All the disease which you have mentioned, from bronchial asthma to gastroenteritis, boils down to one thing, which is inflammation. Now, let us understand why inflammation occurs in the body.

Our body is constructed in a simple manner in which it can only take nutrients from things which are simple and easily digestible. When we load our body with high fat, a chronic lethargic diet, with adulterated and packaged food then it starts causing the problem, not only in digestion, but also, it is tough to absorb nutrients from it.

Hence, diet plays a major role in them. The regime which is filled with diet and exercise is how you amalgamate everything for a better healthy and good lifestyle. Here are a few tips which will help you:


The first thing in the morning is to start your day with something light in nature. Easy to digest is what your breakfast should be because they are the kind of nutrients that get absorbed easily. Even the early morning ritual should include consumption of two-three glasses of warm water will help in flushing out all the toxins. The ideal diet would be to depend on fruits and raw vegetable intake and refrain from something which is oil-based. Have fruit salad in the afternoon time and vegetable salad as evening snack this will be light on your stomach.

  • Sources like lemons, oranges, mosumbi will help in dealing with inflammation.
  • Talk one inch of ginger boiled in two cups of water and add 5-6 basil leaves. Drink during evening time. This will help in dealing with inflammation.
  • One teaspoon of mulethi with one teaspoon of honey, take this paste thrice a day half an hour after your meal will heal your respiratory and digestive problems.
  • A glass of lemon juice before evening meals helps in breaking kidney stones because of the action of citrate.


  • Pranayam helps in detoxifying the body. Practising it early morning in an area which has good sunlight will help in improving blood circulation.
  • Suryanamaskar, daily 12 sets will help in increasing the blood circulation of your body.
  • A brisk walk in early morning sun from 30-45 minutes, helps in treating your body to its level best. Sun is a great source of Vitamin D that is why walking in the sun and connecting with the sun also help in activating our cells and rejuvenates us for the whole day.


In any kind of disease, stress comes complementary to it, but with our assurance and positive attitude, we can treat anything. The best thing to start with is breathing mindfully before sleep with the help of music to stay positive. Use a 15-minute relaxation technique before sleep, by hearing a piece of soothing music and deep breathing will help in relaxing your mind.

A positive attitude will help you to deal with everything in life.


Sleeping for at least 7-8 hours is really helpful in dealing with any problem. Sleep is our body's natural response and helps the body to heal. Sleep relaxes the muscles and strengthens our body. During sleep, our body goes into a repair mechanism where it heals itself.

Hopefully, these suggestions will help you

Thank you.

07:37 PM | 20-04-2020

कारण - मूत्र मार्ग संक्रमण (मूत्र पथ संक्रमण या यूटीआई) सूक्ष्मजीवों (बिना माइक्रोस्कोप के न दिखने वाले जीव) से होने वाला संक्रमण है। अधिकांश यूटीआई बैक्टीरिया के कारण होते हैं लेकिन कभी कभी यह फंगस और वायरस द्वारा भी फैलता है। यह मनुष्यों में होने वाला सबसे आम संक्रमण है। शरीर में अम्ल की अधिकता होने पर संक्रमण का संभावना सबसे अधिक रहता है।
अस्थमा श्वसन संबंधी रोग होता है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है। अस्थमा में श्वास नलियों की सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसनमार्ग संकुचित (सिकुड़ जाना) हो जाता है। श्वसनमार्ग के संकुचित हो जाने से सांस लेते समय आवाज़ आना, श्वास की कमी, सीने में जकड़न और खाँसी आदि समस्याएं होने लगती हैं। यह भी फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है। इसका मूल कारण खराब हाजमा है।
गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) मिनरल्स और नमक से बनी एक ठोस जमावट होती है। उनका माप रेत के दाने जितना छोटा से लेकर गोल्फ की गेंद जितना बड़ा हो सकता है। वे आपके गुर्दे में रह सकती हैं या मूत्र पथ के माध्यम से आपके शरीर से बाहर निकल सकती हैं। खराब आजमा होने के कारण अम्ल की अधिकता होने के कारण स्टोन के रूप में कन्वर्ट हो जाता है।
आपका शरीर कई प्रकार रोगों के माध्यम से बताना चाहता है कि आपके शरीर में हाजमा दुरुस्त नहीं है पाचन तंत्र अस्वस्थ है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को अपनाकर पूर्ण स्वास्थ्य लाभ उठाया जा सकता है।

समाधान-1. एक टब में पानी भरे और उसमें 500 ml नीम की पत्तियों का  रस डालें। उसमें 20 मिनट के लिए बैठे और संकुचन क्रिया करें। UTI की समस्या और किडनी के स्टोन में लाभ होगा।

2. हरे पत्तों में आप पालक के पत्ते धनिया के पत्ते पुदीने के पत्ते तुलसी के पत्ते दूब घास बेलपत्र या  सफेद पेठे का जूस ले सकते हैं। प्रतिदिन इसका सेवन सुबह खाली पेट लें। दोपहर में खाना खाने से घंटा पहले इसका सेवन 200 ml तक करें। डिनर के 1 घंटे पहले इसका सेवन 200ml तक करें। इससे हाजमा में सुधार आएगा।

3. खाना खाने से एक घंटे पहले नाभि के ऊपर गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखें या खाना के 2 घंटे बाद भी ऐसा कर सकते हैं।

मेरुदंड स्नान के लिए अगर टब ना हो तो एक मोटा तौलिया गीला कर लें बिना निचोरे उसको बिछा लें और अपने मेरुदंड को उस स्थान पर रखें। मेरुदंड (स्पाइन) सीधा करके बैठें। हमेशा इस बात ध्यान रखें और हफ़्ते में 3 दिन मेरुदंड का स्नान करें। पाचन तंत्र स्वस्थ होगा। ऑक्सीजन और रक्त का संचार ठीक प्रकार से होगा।

4. प्राणायाम करना है।

लंबा गहरा श्वास अंदर लें रुको थोड़ी देर सांस को पूरी तरीके से खाली करें और फिर रुके थोड़ी देर ऐसा करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन का सरकुलेशन ठीक हो जाएगा ।

5. पेट पर खीरा और नीम के पत्ते का पेस्ट लगाएं। 20 मिनट बाद सादा पानी से साफ कर लें।

जीवन शैली - 1. आकाश तत्व - एक खाने से दुसरे खाने के बीच में अंतराल (gap) रखें।

फल के बाद 3 घंटे, सलाद के बाद 5 घंटे, और पके हुए खाने के बाद 12 घंटे का (gap) रखें।

2.वायु तत्व - प्राणायाम करें, आसन करें। दौड़ लगाएँ।

3.अग्नि - सूर्य की रोशनी लें।

4.जल - अलग अलग तरीक़े का स्नान करें। मेरुदंड स्नान, हिप बाथ, गीले कपड़े की पट्टी से पेट की गले और सर की 20 मिनट के लिए सेक लगाए। 

स्पर्श थरेपी करें। मालिश के ज़रिए भी कर सकते है।

तिल के तेल रीढ़ की हड्डी पर घड़ी की सीधी दिशा (clockwise) में और घड़ी की उलटी दिशा (anti clockwise)में मालिश करें। नरम हाथों से बिल्कुल भी प्रेशर नहीं दें।

5.पृथ्वी - सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आप कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ash guard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100 ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ash guard) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6.एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं।

हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

7. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200 ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।



प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)


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