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Q&A
11:59 AM | 13-07-2020

My mother is feeling pain in the chest and back during eating or drinking at one particular point in the middle. She is 55 yrs old. Please enlighten what is the issue and what can be done? Is it because of gastric issues?

The answers posted here are for educational purposes only. They cannot be considered as replacement for a medical 'advice’ or ‘prescription’. ...The question asked by users depict their general situation, illness, or symptoms, but do not contain enough facts to depict their complete medical background. Accordingly, the answers provide general guidance only. They are not to be interpreted as diagnosis of health issues or specific treatment recommendations. Any specific changes by users, in medication, food & lifestyle, must be done through a real-life personal consultation with a licensed health practitioner. The views expressed by the users here are their personal views and Wellcure claims no responsibility for them.

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2 Answers

11:19 AM | 15-07-2020

हेलो,
कारण - खाना खातेे खाते हृदय में दर्द्द होना इस बात का सूचक हैै कि अम्ल की अधिकता हो गई है। शरीर दर्द के माध्यम से
कुछ कहना करना चाह रहा है। उनके पेट और आंतों की सफाई ठीक प्रकार सेे नहीं हो  रही है। लंबे समय खराब हाजमा और निष्कासन में अवरोध के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है।
प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में इसका समाधान है।

समाधान - 1. चार भिंडी को लंबा काटकर एक गिलास पानी में डाल दें और सुबह खाली पेट नेचुरल मोशन होने से पहले उसको पी लें। पीते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि पानी को मुंह में रख रख के पीए। 

2. सूर्य की रोशनी में 20 मिनट का स्नान सूर्य की रोशनी से करें 5 मिनट सामने 5 मिनट पीछे 5 मिनट दाएं 5 मिनट बाएं भाग में धूप लगाएं। धूप लेट कर लेना चाहिए धूप की रोशनी लेते वक्त सर और आपको किसी सूती कपड़े से ढक ले। सूर्य नारी मंद होने पर  इन्फेक्शन अधिक होता है अतः आप जब भी सोए अपना दायां भाग ऊपर करके सोए। 

3. प्रतिदिन अपने पेट पर खाने से 1 घंटे पहले या खाना खाने के 2 घंटे बाद गीले मोटे तौलिए को लपेटे एक तौलिया गिला करके उसको निचोड़ लें और हूं उस तौलिए को 20 मिनट तक अपने पेट पर लपेटकर रखें ऐसा करने से आपका पाचन तंत्र दुरुस्त होगा।

4. हर 3 घंटे में लंबा गहरा श्वास अंदर लें उसको थोड़ी देर रोकें और फिर सांस को खाली करें। खाली करने के बाद फिर से रुके और फिर लंबा गहरा सांस ले। यह एक चक्र है ऐसा दिन में 10 चक्र करें केवल एक शर्त का पालन करें जब आप लंबा गहरा सांस ले रहे हैं तो अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें ऐसा करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का बढ़ेगी और ऑक्सीजन का संचार सुचारू रूप से हो पाएगा।

5.सुबह खीरा 1/2 भाग धनिया पत्ती (10 ग्राम) पीस लें, 100 ml पानी मिला कर पीएँ। यह juice आ कई प्रकार के ले सकते हैं। पेठे (ash guard ) का जूस लें और कुछ नहीं लेना है। नारियल पानी भी ले सकते हैं। पालक  पत्ते धो कर पीस कर 100ml पानी डाल पीएँ। दुब घास 25 ग्राम पीस कर छान कर 100 ml पानी में मिला कर पीएँ। कच्चे सब्ज़ी का जूस आपका मुख्य भोजन है। 2 घंटे बाद फल नाश्ते में लेना है। 

फल को चबा कर खाएँ। इसका juice ना लें। फल सूखे फल नाश्ते में लें।

दोपहर के खाने में सलाद नट्स और अंकुरित अनाज के साथ  सलाद में हरे पत्तेदार सब्ज़ी को डालें और नारियल पीस कर मिलाएँ। कच्चा पपीता 50 ग्राम कद्दूकस करके डालें। कभी सीताफल ( yellow pumpkin)50 ग्राम ऐसे ही डालें। कभी सफ़ेद पेठा (ash guard) 30 ग्राम कद्दूकस करके डालें। ऐसे ही ज़ूकीनी 50 ग्राम डालें।कद्दूकस करके डालें।कभी काजू बादाम अखरोट मूँगफली भिगोए हुए पीस कर मिलाएँ। 

लाल, हरा, पीला शिमला मिर्च 1/4 हिस्सा हर एक का मिलाएँ। लें। बिना नींबू और नमक के लें। स्वाद के लिए नारियल और herbs मिलाएँ।

रात के खाने में इस अनुपात से खाना खाएँ 2 कटोरी सब्ज़ी के साथ 1कटोरी चावल या 1रोटी लेएक बार पका हुआ खाना रात को 7 बजे से पहले लें।

6. एक नियम हमेशा याद रखें ठोस(solid) खाने को चबा कर तरल (liquid) बना कर खाएँ। तरल  को मुँह में घूँट घूँट पीएँ। खाना ज़मीन पर बैठ कर खाएँ। खाते वक़्त ना तो बात करें और ना ही TV और mobile को देखें।ठोस  भोजन के तुरंत बाद या बीच बीच में जूस या पानी ना लें। भोजन हो जाने के एक घंटे बाद तरल पदार्थ ले सकते हैं। हफ़्ते में एक दिन उपवास करें। शाम तक केवल पानी लें, प्यास लगे तो ही पीएँ। शाम 5 बजे नारियल पानी और रात 8 बजे सलाद लें।

7. उपवास के अगले दिन किसी प्राकृतिक चिकित्सक के देख रेख में टोना लें। जिससे आँत की प्रदाह को शांत किया जा सके। एनिमा किट मँगा लें। यह किट ऑनलाइन मिल जाएगा। इससे 200ml पानी गुदाद्वार से अंदर डालें और प्रेशर आने पर मल त्याग करें। ऐसा दिन में दो बार करना है अगले 21 दिनों के लिए। ये करना है ताकि शरीर में मोजुद विषाणु निष्कासित हो जाये। इसके बाद हफ़्ते में केवल एक बार लेना है उपवास के अगले दिन। टोना का फ़ायदा तभी होगा जब आहार शुद्धि करेंगे।

धन्यवाद।

रूबी, 

प्राकृतिक जीवनशैली प्रशिक्षिका व मार्गदर्शिका (Nature Cure Guide & Educator)



12:00 PM | 16-07-2020

Hello User,

Yes, it is due to the same. 

Regular consumption of fatty diet and highly spiced food, toxins are the primary cause of any health issue. What needs to be taken care of now is the fact that a major change in lifestyle and diet will be the cure of the problem. The lighter the food in its nature the easier it is to absorb but what we do is accumulate ourselves with a lot of high-fat diets and a sedentary lifestyle which only is the result of the accumulation of toxins.

In ulcers with the consumption of this kind of food, what becomes an issue is from the oesophagus to rectum everything is disturbed. The toxins are in the body, call ulcers in the oesophagus or infection they relate to the same cause.

With a healthy change in the diet and your routine, we can readily deal with all the issues related to the problem of poor absorption and indigestion. What makes a major difference is by changing lifestyle, that we are not only curing the disease at this stage but also preventing it.

Now let us understand what changes we can make:

Eat:

The first thing in the morning is starting your day with something light in nature and easy to digest is what your breakfast should be because they are the kind of nutrients that gets absorbed easily. Even the early morning ritual should include consumption of two-three glasses of warm water will help in flushing out all the toxins. The next thing is including a fibre-rich food item which helps in adding bulk to the stools, for example having apples, bananas, nuts, etc. which has a good amount of fibre in them.

The ideal diet would be to depend on fruits and raw vegetable intake at least for one month and refrain from something which is oil-based. Have fruit salad in the afternoon and vegetable salad as evening snack this will be light on your stomach.

  • Keep a two-hour gap between your meals and sleeping hours.
  • Aloe vera juice is soothing and hastens the cure of digestive issues.
  • Include fibre rich diet in your meal for better stools.
  • Tomato with black pepper an hour before dinner is helpful for dealing with gastritis. 

Exercise:

  • Sitting in the position of Vajraasana will help in the treatment of piles. After your meals practice, this poses for better digestion and easy stools.
  • A brisk walk in early morning sun from 30-45 minutes, helps in treating your body to its level best. Sun is a great source of Vitamin D that is why walking in the sun and connecting with the sun also help in activating our cells and rejuvenate us for the whole day.

Meditation:

In any kind of disease, stress comes complementary to it, but with our assurance and positive attitude, we can treat anything. The best thing to start with is breathing mindfully before sleep with the help of music to stay positive.

In a room take a bowl of water and add two-three drops of orange or lavender essential oils this will help in soothing you and the fragrance will relax you.

A positive attitude will help you to deal with everything in life.

Sleep:

Sleeping for at least 7-8 hours is really helpful in dealing with any problem, sleep is our body's natural response and helps the body to heal. Sleep relaxes the muscles and strengthens our body.

Hopefully, these suggestions will help you

Thank you


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